kushwaha

Just another weblog

162 Posts

3308 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 7694 postid : 768915

लखनऊ --कोटि कोटि नमन // प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा ///

Posted On: 31 Jul, 2014 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

लखनऊ –कोटि कोटि नमन // प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा ///
————————————————————–
शहर ए लखनऊ तुझे
सादर प्रणाम है
बहती यहाँ है गोमती
लक्ष्मण जी का धाम है
———————————
चन्द्रिका देवी मंदिर मनोहर
रकाब गंज का गुरुद्वारा
टीले वाली मस्जिद संग संग
बुद्धेश्वरन शिव धाम है
——————————-
जी. पी. ओ. अदालत पुरानी
काकोरी की अमर  कहानी
क्रांति  वीरों की पावन धरा
शहीद स्मारक पहचान है
——————————–
अमीनाबाद की रेवडी
चौक में चिकन का काम
मलिहाबाद को कैसे भूलें
प्रसिद्ध  दशहरी आम है
———————————-
गंगा जमनवी सभ्यता संस्कृति
घर घर यहाँ फूलती फलती
अलीगंज के वीर  बजरंगी
इसका  आदर्श प्रमाण  हैं
———————————-
पुरवा  चलती पछुवा चलती
एक अनूठी संस्कृति पलती
बनारस की जो सुबह प्यारी
मशहूर  अवध की शाम है
——————————–
प्रार्थना  होती चर्च में
गुरुद्वारे में हो वाह गुरु
घंटी बजती मंदिर में
मस्जिद से आती अजान है
——————————–
ईद हमारी होली उनकी
घर घर मिलने टोली चलती
मिलते गले इक दूजे से जैसे
कई जन्मों की पहचान है
——————————
होली दिवाली ईद सिवैयां
खेलत संग संग गुइयाँ गुइयाँ
आपस में मिल जुल रहते ऐसे
एक घर  रहीम दूजे घर  राम है
———————————
प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा
२९-०७-२०१४

लखनऊ –कोटि कोटि नमन // प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा ///

————————————————————–

शहर ए लखनऊ तुझे

सादर प्रणाम है

बहती यहाँ है गोमती

लक्ष्मण जी का धाम है

———————————

चन्द्रिका देवी मंदिर मनोहर

रकाब गंज का गुरुद्वारा

टीले वाली मस्जिद संग संग

बुद्धेश्वरन शिव धाम है

——————————-

जी. पी. ओ. अदालत पुरानी

काकोरी की अमर  कहानी

क्रांति  वीरों की पावन धरा

शहीद स्मारक पहचान है

——————————–

अमीनाबाद की रेवडी

चौक में चिकन का काम

मलिहाबाद को कैसे भूलें

प्रसिद्ध  दशहरी आम है

———————————-

गंगा जमनवी सभ्यता संस्कृति

घर घर यहाँ फूलती फलती

अलीगंज के वीर  बजरंगी

इसका  आदर्श प्रमाण  हैं

———————————-

पुरवा  चलती पछुवा चलती

एक अनूठी संस्कृति पलती

बनारस की जो सुबह प्यारी

मशहूर  अवध की शाम है

——————————–

प्रार्थना  होती चर्च में

गुरुद्वारे में हो वाह गुरु

घंटी बजती मंदिर में

मस्जिद से आती अजान है

——————————–

ईद हमारी होली उनकी

घर घर मिलने टोली चलती

मिलते गले इक दूजे से जैसे

कई जन्मों की पहचान है

——————————

होली दिवाली ईद सिवैयां

खेलत संग संग गुइयाँ गुइयाँ

आपस में मिल जुल रहते ऐसे

एक घर  रहीम दूजे घर  राम है

———————————

प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा

२९-०७-२०१४

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
August 1, 2014

ऐ शहरे लकनऊ तुझे मेरा सलाम है ..तेरा ही नाम दूसरा जन्नत का नाम है…उम्मीद है लखनऊ अपनी तहजीब को आगे भी कायम रखेगा …कभी काला टीका नहीं लगाएगा कविता के माध्यम से लखनऊ की खासियत का परिचय करने के लिए आपका आभार!

pkdubey के द्वारा
July 31, 2014

बहुत सुन्दर रचना आदरणीय | शायद ऐसी रचनाओं को लखनऊवासियों को पढ़ने की नितांत आवश्यकता है |


topic of the week



latest from jagran