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फतवा (लघुकथा)

Posted On: 16 Mar, 2014 Others में

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मौलवी साहिब के घर गहरी उदासी छाई हुई थी. उनके तीनो बच्चों को डॉकटरी जांच के दौरान पोलियों रोग से ग्रस्त पाया गया था. उम्र अधिक होने के कारण अब उन बच्चों का इलाज भी सम्भव नहीं था. अत: ज़िंदगी भर के लिए बच्चों के अपाहिज होने की कल्पना मात्र से ही हर कोई दुखी था. मोहल्ले के गरीब और निरक्षर परिवारों के दौड़ते भागते तंदरुस्त बच्चों को देखकर पढ़े लिखे मौलवी साहिब बार बार यही सोच रहे थे कि काश उन्होंने भी धार्मिक फतवों से ज्यादा अपने बच्चों की परवाह की होती।

प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

R K KHURANA के द्वारा
March 16, 2014

एक शिक्षाप्रद लघुकथा ! अति उत्तम ! राम कृष्ण खुराना


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