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हरियाली // कुशवाहा //

Posted On: 24 Feb, 2014 Others में

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हरियाली
————-
कटते  प्रतिदिन वन  और  उपवन
बिगड़  रहा  है  प्रकृति  संतुलन
यह  व्यथा  तुम अपनी  न मानो
संकट में  है  धरती  जानो
—————————————
उर्वर  धरती  का श्रृंगार
पेड़ – पौधे लगें  अपार
हरियाली से होगी खुशियाली
यही है  जीवन  का आधार
————————————–
प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
March 3, 2014
surendra shukla bhramar5 के द्वारा
March 3, 2014

पेड़ – पौधे लगें अपार हरियाली से होगी खुशियाली यही है जीवन का आधार आदरणीय कुशवाहा जी सुन्दर सन्देश काश लोगों के मन में ये घुसे …तो आनंद और आये . भ्रमर ५


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