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दिवस

Posted On: 30 Oct, 2013 Others,Entertainment,Hindi Sahitya में

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दिवस

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जो अनुभूतियां

कभी हम जीते थे

अब उन्हीं के स्मृति कलश सजाकर

प्रतीक रूप में चुन चुनकर

नित दिवस मनाते हैं

परम्परा तो स्वस्थ है

भावनाओं के इस रेगिस्तान में

इसी बहाने मंद बयार का एहसास

ये दिवस दे जाते हैं।

प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

December 2, 2013

सादर चरण स्पर्श, नानाजी……………. कभी हम जीते थे अब उन्हीं के स्मृति कलश सजाकर प्रतीक रूप में चुन चुनकर नित दिवस मनाते हैं\\\\\……………………सत्य और सटीक………………………………….हार्दिक आभार.

dineshaastik के द्वारा
November 20, 2013

सुन्दर….


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