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चलो पौध लगाएं

Posted On: 20 Jun, 2012 Others में

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चलो   पौध   लगाएं

चलो   पौध   लगाएं   हम
खेतों   में    जाएँ
खलिहानो    में    जाएँ
चुन   चुन   ठीक  जगह
गड्ढे    बनायें     हम
चलो   पौध   लगाएं

चलो   पौध   लगाएं
चलो   पौध   लगाएं   हम
आया    बरखा    का    मौसम
पानी    बरसेगा    झम    झम
खेती    होगी     उत्तम
बाजार   जाएँ    बीज  पौधे   लाएं
खाद   पानी   डाल  पौध    लगाएं   हम

चलो   पौध   लगाएं  

चलो   पौध   लगाएं
चलो   पौध   लगाएं   हम

नर्सरी   में    जाना

स्वस्थ   पौधे   ही    लाना
आम    जामुन    नीम    नीबू
अमरुद   कटहल   का   जमाना
लाइन   से    लगाएं
दूरी    बनायें   रक्खे   हम
चलो   पौध   लगाएं

चलो   पौध   लगाएं
चलो   पौध   लगाएं   हम

लग   जाएँ    जब    पौधे

सोना   न    मुहं     औंधे
जानवर   आये    चिडियाँ    खाएं
उनसे   चलो    बचाएं
चलो   पौध   लगाएं

चलो   पौध   लगाएं
चलो   पौध   लगाएं   हम

आज   लगेंगे

कल   ये   फलेंगे
मोटा    मिलेगा    दाम
बाजार    चलेंगे   साथ   बेचेंगे
जीवन    सफल   बनायें    हम
चलो   पौध   लगाएं

चलो   पौध   लगाएं
चलो   पौध   लगाएं   हम
छायेगी  जग   हरियाली
रूप   सजेगी   घरवाली
संकल्प   होगा   तभी  सफल
फलदार   सगंध    खेती
दोनों   कराएँगे    हम
चलो   पौध   लगाएं

चलो   पौध   लगाएं
चलो   पौध   लगाएं   हम

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50 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aman kumar के द्वारा
October 11, 2012

सुदर रचना !

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    October 11, 2012

    स्वागत है अमन जी आपका. स्नेह हेतु आभार

ajaykr के द्वारा
June 26, 2012

परम सम्मानित कुशवाहा जी,आपकी कविता बहुत प्रेरक हैं ,संकल्प ही सफलता की नीव हैं ,हमारे ब्लॉग पर आपको सादर आमंत्रण हैं – http://avchetnmn.jagranjunction.com.

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    July 1, 2012

    स्वागत एवं आभार महोदय जी,

allrounder के द्वारा
June 23, 2012

आदरणीय कुशवाहा जी, कविता के माध्यम से बेहद सार्थक सन्देश दिया है, आपने पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए न सिर्फ वृक्षारोपण आवश्यक है अपितु जो वृक्ष हैं उनका संरक्षण भी नितांत आवश्यक है !

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 23, 2012

    धन्यवाद सचिन जी, समर्थन हेतु, सादर

akraktale के द्वारा
June 23, 2012

आदरणीय प्रदीप जी सादर नमस्कार, आज लगेंगे कल ये फलेंगे मोटा मिलेगा दाम बाजार चलेंगे साथ बेचेंगे जीवन सफल बनायें हम चलो पौध लगाएं चलो पौध लगाएं चलो पौध लगाएं हम आप किसानो को दिलाएंगे मोटा दाम और सरकार बाचारी मुफ्त में होगी बदनाम. सुन्दर मौसम के अनुकूल रचना. किन्तु मालवा अभी पानी को तरस रहा है सोयाबीन की बुवाई में देरी हो रही है क्योंकि मानसून दस दिन लेट होने की संभावनाएं है. सुन्दर रचना. बधाई.

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय अशोक जी, सादर भारी समर्थन हेतु आभार. मानसून कम रहेगा.

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
June 23, 2012

आदरणीय कुशवाहा जी सादर प्रणाम सुन्दर, सन्देश-प्रद रचना के लिए हार्दिक आभार….

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 23, 2012

    धन्यवाद अजय जी, सादर

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 22, 2012

चलो पौध लगाएं हम छायेगी जग हरियाली रूप सजेगी घरवाली संकल्प होगा तभी सफल फलदार सगंध खेती दोनों कराएँगे हम चलो पौध लगाएं चलो पौध लगाएं आदरणीय कुशवाहा जी बहुत सुन्दर… हरित क्रान्ति …सुन्दर सन्देश …सारी विधि बता दिया आप ने ..मन कुछ तो हुमसेगा हुलसेगा ही …. भ्रमर ५

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आभार आदरणीय भ्रमर जी, सादर

vinitashukla के द्वारा
June 22, 2012

सुन्दर एवं प्रेरक पोस्ट आदरणीय कुशवाहा जी. बधाई और साधुवाद.

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय विनीता जी, सादर आभार स्नेह हेतु.

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
June 22, 2012

प्रदीप जी बहुत ही जागरूक करने वाली कविता है आपकी, बहुत बहुत अच्छी कविता के लिए बधाई, मेरे ब्लॉग पर आप जैसे अनुभवी लोगो की राय की मुझे इंतज़ार रहता है कृपया मेरी इस पोस्ट पर अपने विचार प्रकट करें. http://panditsameerkhan.jagranjunction.com/2012/06/20/नारी-का-जीवन

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आपका हार्दिक स्वागत है. आभार समर्थन हेतु.

Punita Jain के द्वारा
June 22, 2012

आदरणीय कुशवाहा जी , सही समय पर व्यावहारिक सन्देश देती हुई बहुत प्यारी और सुन्दर कविता | आज हम पौधें लगायेंगे , अपने को वायु प्रदूषण से बचायेंगे , धरती माँ का कर्ज चुकायेंगे , आने वाले कल का अस्तित्व बचायेंगे |

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय पुनीत जी, भारी समर्थन हेतु आभार.

alkargupta1 के द्वारा
June 22, 2012

कुशवाह जी ,बहुत ही महत्त्वपूर्ण और सुन्दर सन्देश दिया है बहुत बढ़िया कविता

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीया अलका जी, सादर धन्यवाद,

yamunapathak के द्वारा
June 22, 2012

बहुत सरलता और sundarataa से आपने जन-जन तक सुन्दर सन्देश पहुंचाया है sir

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीया पाठक जी , सादर लिखना सार्थक हुआ. धन्यवाद.

rekhafbd के द्वारा
June 22, 2012

आदरणीय प्रदीप जी ,पौध लगायें ,और हरयाली लायें ,सुंदर संदेश देती हुई कविता ,बधाई

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीया रेखा जी, सादर आपकी विस्तृत टिप्पणी, उर्जा देती है आभार

yogi sarswat के द्वारा
June 22, 2012

आदरणीय प्रदीप कुशवाहा जी , सादर नमस्कार ! बिलकुल सही मौसम में आपने ये रचना दी है ! मानसून आने वाला है , तैयार रख लीजिये ! सुन्दर रचना

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीय योगी जी, सादर आपकी प्रेरणा मुझे आगे बढ़ाती है. धन्यवाद

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
June 22, 2012

आदरणीय कुशवाहा जी , पर्यावरण सुरक्षा के लिए पौधों को लगाना ही नहीं बल्कि लोगों को जागरूक करना भी एक पुनीत कार्य है. लोगों को पौधे लगाने का सन्देश देती हुई एक सार्थक कविता के लिए हार्दिक बधाई!

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीय भूपेश जी, सादर आपने समय दिया ,प्रोत्साहित किया. आभार

chaatak के द्वारा
June 22, 2012

आदरणीय कुशवाहा जी, सादर अभिवादन, पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी का अहसास कराती इन पंक्तियों के लेखन पर हार्दिक बधाई!

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीय चातक जी, सादर समर्थन हेतु आभार

seemakanwal के द्वारा
June 21, 2012

सुन्दर होगा ये संसार ,पौधें हों जब अपरम्पार ,पर्यावरण का सन्देश देती प्यारी सी रचना है ,

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीया सीमा जी , सादर स्वागत है आपका . आभार स्नेह हेतु. आगे भी

चन्दन राय के द्वारा
June 21, 2012

कुशवाहा जी , लो पौध लगाएं हम खेतों में जाएँ खलिहानो में जाएँ चुन चुन ठीक जगह गड्ढे बनायें हम चलो पौध लगाएं चलो पौध लगाएं, पर्यावरण और वसुधा को समर्पित सुन्दर रचना !

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    प्रिय चन्दन जी, सस्नेह सह्रदयता हेतु आभार

nishamittal के द्वारा
June 21, 2012

सार्थक आह्वान कुशवाह जी.

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीया निशा जी, सादर समर्थन हेतु आभार.

jlsingh के द्वारा
June 21, 2012

छायेगी जग हरियालीरूप सजेगी घरवालीसंकल्प होगा तभी सफलफलदार सगंध खेतीदोनों कराएँगे हमचलो पौध लगाएं चलो पौध लगाएं चलो पौध लगाएं हम …कल ही गाँव से खबर आई थी धान का बिचरा (मोरी) के लिए धान का बीज खेत में डाल दिया गया है.वर्षा आने से पहले भूगर्भ जल से सिंचित कर दिया गया है.. अब शायद वहां भी वर्षा हो रही होगी. किसान खुशी से मस्त हुए जा रहे होंगे, पके आम, कटहल, जामुन का स्वाद ले रहे होंगे.हमसब वातानुकूलित कमरे में बैठकर उनका ध्यान कर रहे होंगे. श्रद्धेय कुशवाहा जी, सादर अभिवादन! आप कोई जगह खाली न छोड़ेगें, बस चले तो लैपटॉप पर भी वृक्ष उगा ही डालेंगे!शुद्ध हवा की बहुत जरूरत है.

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीय सिंह साहब जी, सादर आपकी विस्तृत समीक्षा ज्ञान वर्धक एवं प्रेरणा देती है. आभार

dineshaastik के द्वारा
June 21, 2012

आदरणीय प्रदीप जी सुन्दर संदेश  देती हुई कविता की प्रस्तुति के  लिये बधाई……

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीय दिनेश जी, सादर आपका स्नेह बना रहे आभार.

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 20, 2012

आदरणीय कुशवाहा जी ….. सादर प्रणाम ! यह घरवालिया भी कैसी अजीब होती है ….. फसल बेच कर आई हुई कमाई से सज संवर क्र खुशी मिलती है इन्हें जबकि पेड़ो पर पके हुए फलों को देख कर अवर्णनीय सुख मिलता है और चख कर अद्भुत आनन्द की प्राप्ति होती है …. बहुत ही बढ़िया सीख भरा बेहतरीन आह्वाहन है आपका ….. लेकिन दुःख की बात तो यही है की जितने पेड़ कटते है उतने लगाए नहीं जाते – और जो लगाये जाते हैं उनमे फलदार नाममात्र ही होते है ….. अति सुन्दर रचना पर मुबारकबाद

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीय राज कमल जी, सादर सकारात्मक प्रतिक्रिया हेतु आभार .

roshni के द्वारा
June 20, 2012

Respected परदीप जी नमस्कार चलो पौध लगाएं अपना और आने वाले युग का जीवन खुश हाल बनाये चलो पौध लगाएं सुंदर कविता के लिए बधाई आभार

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    आदरणीय रोशनी जी , सादर समर्थन हेतु आभार

Santosh Kumar के द्वारा
June 20, 2012

श्रद्धेय सर ,..सादर प्रणाम रचना की प्रशंसा नहीं कर पाऊँगा ,…दिल के तार हिला दिए ,..तमन्ना और झंकृत हो गयी ,..सादर अभिनन्दन

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    प्रिय संतोष जी, सस्नेह आपने अपने व्यस्त समय में रचना का आनंद लिया. धन्यवाद

vikramjitsingh के द्वारा
June 20, 2012

वाह नाना श्री जी….वाह!!! क्या ग़ज़ब की कविता है…आपकी… (वैसे एक गाना भी याद आ रहा है…..चलो इश्क लड़ाएं…..चलो इश्क लड़ाएं….सनम) उम्मीद है….अन्यथा नहीं लेंगे….. सादर……

    June 20, 2012

    अरे विक्रम भैया, हमारे नानाजी सटिया गए हैं……बुढौती का असर साफ़ दिखने लगा…………वरना होशियारों और मर्यादित सभ्य लोगों की तरह पेड़ों को काटने की बात करते …………..

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    प्रिय नाती श्री विक्रम जी , सस्नेह नानी आपकी सूत्रधार पार्क में हुआ विचार बैठे बेंच पे बोला खिसको नानी बोली चलो डिस्को दिसलो में जाएँ ..चलो पौध लगाये. बिलकुल सही जवाब ..लोक किया जाए ?

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    प्रिय नाती अनिल श्री , सस्नेह आपकी बात से सहमत. करारा व्यंग आज के समय पर. बधाई एवं धन्यवाद


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